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रचनाकार

मधुकर अष्ठाना जन्म- 27-10-1939 शिक्षा- एम.ए. (हिंदी साहित्य एवं समाजशास्त्र) प्रकाशन- सिकहर से भिनसहरा (भोजपुरी गीत संग्रह), गुलशन से बयाबां तक (हिंदी ग़ज़ल संग्रह) पुरस्कृत, वक़्त आदमखोर (नवगीत संग्रह), न जाने क्या हुआ मन को (श्रृंगार गीत/नवगीत संग्रह), मुट्ठी भर अस्थियाँ (नवगीत संग्रह), बचे नहीं मानस के हंस (नवगीत संग्रह), दर्द जोगिया ठहर गया (नवगीत संग्रह), और कितनी देर (नवगीत संग्रह), कुछ तो कीजिये (नवगीत संग्रह) | इसके अतिरिक्त तमाम पत्र-पत्रिकाओं तथा दर्जनों स्तरीय सहयोगी संकलनों में गीत/नवगीत संग्रहीत | सम्मान-पुरस्कार- अब तक 42 सम्मान व पुरस्कार विशेष- ‘अपरिहार्य’ त्रैमासिक के अतिरिक्त संपादक, ‘उत्तरायण’ पत्रिका में सहयोगी तथा ‘अभिज्ञानम’ पत्रिका के उपसंपादक | कई विश्वविद्यालयों में व्यक्तित्व व कृतित्व पर लघुशोध व शोध | वर्तमान में जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी, परिवार कल्याण विभाग, उ.प्र. से सेवानिवृत्त होकर स्वतंत्र लेखन | संपर्क सूत्र- ‘विद्यायन’ एस.एस. 108-109 सेक्टर-ई, एल.डी.ए. कालोनी लखनऊ | उनके एक नवगीत की कुछ पंक्तियाँ- जग ने जितना दिया ले लिया उससे कई गुना बिन मांगे जीवन …

कविता क्या है- कुमार रवींद्र

     कुमार रवींद्र


कविता क्या है
यह जो अनहद नाद बज रहा भीतर

एक रेशमी नदी सुरों की
अँधियारे में बहती
एक अबूझी वंशीधुन यह
जाने क्या-क्या कहती

लगता
कोई बच्ची हँसती हो कोने में छिपकर

या कोई अप्सरा कहीं पर
ग़ज़ल अनूठी गाती
पता नहीं कितने रंगों से
यह हमको नहलाती

चिड़िया कोई हो
ज्यों उड़ती बाँसवनों के ऊपर

काठ-हुई साँसों को भी यह
छुवन फूल की करती
बरखा की पहली फुहार-सी
धीरे-धीरे झरती

किसी आरती की
सुगंध-सी कभी फैलती बाहर

नाजिम हिकमत की कविताएँ

नाजिम हिकमत
आशावाद कविताएँ लिखता हूँ मैं वे छप नहीं पातीं लेकिन छपेंगी वे. मैं इंतजार कर रहा हूँ खुश-खैरियत भरे खत का शायद वो उसी दिन पहुँचे जिस दिन मेरी मौत हो लेकिन लाजिम है कि वो आएगा. दुनिया पर सरकारों और पैसे की नहीं बल्कि अवाम की हुकूमत होगी अब से सौ साल बाद ही सही लेकिन ये होगा ज़रूर. (अंग्रेजी से अनुवाद- दिगम्बर)
मैं तुम्हें प्यार करता हूँ
घुटनों के बल बैठा- मैं निहार रहा हूँ धरती, घास, कीट-पतंग, नीले फूलों से लदी छोटी टहनियाँ. तुम बसंत की धरती हो, मेरी प्रिया, मैं तुम्हें निहार रहा हूँ. पीठ के बल लेटा- मैं देख रहा हूँ आकाश, पेड़ की डालियाँ, उड़ान भरते सारस, एक जागृत सपना. तुम बसंत के आकाश की तरह हो, मेरी प्रिया, मैं तुम्हें देख रहा हूँ. रात में जलाता हूँ अलाव- छूता हूँ आग, पानी, पोशाक, चाँदी. तुम सितारों के नीचे जलती आग जैसी हो, मैं तुम्हें छू रहा हूँ. मैं काम करता हूँ जनता के बीच- प्यार करता हूँ जनता से, कार्रवाई से, विचार से, संघर्ष से.

दलित और आदिवासी स्वरों की संवेदना समझनी होगी: नागर

प्रयास संस्थान की ओर से सूचना केंद्र में शनिवार को आयोजित समारोह में वर्ष 2014का डॉ. घासीराम वर्मा साहित्य पुरस्कार जयपुर के ख्यातनाम साहित्यकार भगवान अटलानी को दिया गया। नामचीन लेखक-पत्राकार विष्णु नागर के मुख्य आतिथ्य में हुए कार्यक्रम में उन्हें यह पुरस्कार एकांकी पुस्तक ‘सपनों की सौगात’ के लिए दिया गया। समारोह को संबोधित करते हुए नागर ने कहा कि आज हमारा समाज धर्म और जातियों में इस प्रकार बंट गया है कि हम एक-दूसरे से ही खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं लेकिन हमें यह समझना होगा कि यदि परस्पर भरोसा कायम नहीं रहा तो केवल तकनीक और वैज्ञानिक प्रगति के सहारे ही हम सुखी नहीं रह सकते। उन्होंने कहा कि हजारों वर्षों के अन्याय और शोषण के बाद अब दलित और आदिवासी स्वर उठने लगे हैं तो हम उनकी उपेक्षा नहीं कर सकते बल्कि हमें उन स्वरों की संवेदना को समझना चाहिए। जब तक समाज के तमाम तबकों की भागीदारी तय नहीं होगी, समाज और देश की एक बेहतर और संपूर्ण तस्वीर संभव नहीं है। अटलानी के रचनाकर्म पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए नागर ने कहा कि वर्तमान में व्यक्ति तमाम तरह के अंतर्विरोधों से घिरा हुआ है और हमार…

सन्निधि संगोष्ठी विस्तृत रिपोर्ट माह : अगस्त 2014

सन्निधि संगोष्ठी अंक : 17
दिनाँक / माह :31 अगस्त रविवार 2014
विषय :सोशल मीडिया और लेखन




नए रचनाकारों को प्रोत्साहित करने के मकसद से पिछले पंद्रह महीने से लगातार संचालित की जाने वाली संगोष्ठी इस बार ‘सोशल मीडिया और लेखन’ विषय पर केंद्रित थी। ये संगोष्ठी 31 अगस्त रविवार सन्निधि सभागार में डॉ. विमलेश कांति वर्मा, पूर्व अध्यक्ष, हिंदी अकादमी, दिल्ली, की अध्यक्षता में सफलता पूर्वक संपन्न हुई .......

स्वागत भाषण के दौरान विष्णु प्रभाकर प्रतिष्ठान के मंत्री अतुल कुमार ने घोषणा की कि विष्णु प्रबाकर की स्मृति में जो सम्मान शुरू किया गया है, वह अब हर साल दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसी के साथ दिसबंर में काका कालेलकर के जन्मदिन पर भी काका कालेलकर सम्मान दिए जाएंगे।

संगोष्ठी के संचालक और वरिष्ठ पत्रकार प्रसून लतांत ने कहा कि सोशल मीडिया का दायरा केवल संपन्न और पढ़े-लिखे लोगों तक सीमित है लेकिन यहां संकीर्ण सोच के कारण उत्पन्न त्रासदी की चपेट में वे लोग भी आ जाते हैं, जिनका इससे कोई लेना-देना नहीं होता।

विषय प्रवेशक के रूप में शिवानंद द्विवेदी सेहर ने अपने वक्तव्य में कहा…

संकलन व विशेषांक

‘शब्द व्यंजना’हिन्दी साहित्य की मासिक ई-पत्रिका है जो हिन्दी भाषा व साहित्य के प्रचार-प्रसार के लिए दृढ़ संकल्पित है. पत्रिका ने लगातार यह प्रयास किया है कि हिन्दी साहित्य के वरिष्ठ रचनाकारों के श्रेष्ठ साहित्य से पाठकों को रू-ब-रू कराने के साथ नए रचनाकारों को भी मंच प्रदान करे. नियमित मासिक प्रकाशन के साथ ही पत्रिका समय-समय पर विधा-विशेष तथा विषय-विशेष पर आधारित विशेषांक भी प्रकाशित करेगी जिससे कि उस क्षेत्र में कार्यरत रचनाकारों की श्रेष्ठ रचनाओं को पाठकों तक पहुँचाया जा सके. इस तरह के विशेषांक में सम्मिलित रचनाकारों की रचनाओं को पुस्तक रूप में भी प्रकाशित करने का प्रयास होगा.
इसी क्रम में ‘शब्द व्यंजना’ का नवम्बर अंक ‘कविता विशेषांक’ के रूप में प्रकाशित किया जाएगा. साथ ही, इस अंक में सम्मिलित रचनाकारों की अतुकांत कविताओं का संग्रह पुस्तक रूप में भी प्रकाशित करना प्रस्तावित है. यह कविता संकलन ‘सारांश समय का’ नाम से प्रकाशित होगा.
पत्रिका अभी अपने शुरुआती दौर में है और व्यासायिक न होने के कारण अभी पत्रिका के पास ऐसा कोई स्रोत नहीं है जिससे पुस्तक-प्रकाशन के खर्च को वहन किया जा सके इसलिए…

संकलन व विशेषांक

‘शब्द व्यंजना’ हिन्दी साहित्य की मासिक ई-पत्रिका है जो हिन्दी भाषा व साहित्य के प्रचार-प्रसार के लिए दृढ़ संकल्पित है. पत्रिका ने लगातार यह प्रयास किया है कि हिन्दी साहित्य के वरिष्ठ रचनाकारों के श्रेष्ठ साहित्य से पाठकों को रू-ब-रू कराने के साथ नए रचनाकारों को भी मंच प्रदान करे. नियमित मासिक प्रकाशन के साथ ही पत्रिका समय-समय पर विधा-विशेष तथा विषय-विशेष पर आधारित विशेषांक भी प्रकाशित करेगी जिससे कि उस क्षेत्र में कार्यरत रचनाकारों की श्रेष्ठ रचनाओं को पाठकों तक पहुँचाया जा सके. इस तरह के विशेषांक में सम्मिलित रचनाकारों की रचनाओं को पुस्तक रूप में भी प्रकाशित करने का प्रयास होगा.
इसी क्रम में ‘शब्द व्यंजना’ का नवम्बर अंक ‘कविता विशेषांक’ के रूप में प्रकाशित किया जाएगा. साथ ही, इस अंक में सम्मिलित रचनाकारों की अतुकांत कविताओं का संग्रह पुस्तक रूप में भी प्रकाशित करना प्रस्तावित है. यह कविता संकलन ‘सारांश समय का’ नाम से प्रकाशित होगा.
पत्रिका अभी अपने शुरुआती दौर में है और व्यासायिक न होने के कारण अभी पत्रिका के पास ऐसा कोई स्रोत नहीं है जिससे पुस्तक-प्रकाशन के खर्च को वहन किया जा सके इसल…