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कुछ अपनी बात

ऋतुराज बसंत! शरद ऋतु की समाप्ति तथा ग्रीष्म के आगमन अर्थात् समशीतोष्ण वातावरण के प्रारम्भ होने का संकेत है बसंत। यह सृजनात्मक शक्ति के नव पल्लवन की ऋतु है। यह मौसम प्रकृति की सरसता में ऊर्जा का संचार करता है। यही कारण है कि इस मौसम में न केवल प्रकृति का कण-कण खिल उठता है वरन मानव, पशु-पक्षी सभी उल्लास से भर जाते हैं। तरंगित मन, पुलकित जीवन का मौसम बसंत जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, आशा व विश्वास उत्पन्न करता है; नए सिरे से जीवन को शुरू करने का संकेत देता है।  भारतीय सभ्यता- संस्कृति का सर्वोच्च त्यौहार होली बसंत ऋतु में मनाया जाता है। होली उल्लास का पर्व है। होली प्रतीक है अल्हड़ता का, उमंग का, रंगों का। होली के माध्यम से जीवन में उत्साह का संचार होता है। इस मौसम की मादकता से कोई अछूता नहीं रहता है। चारों ओर बिखरे रंग और उन्मुक्त हास-परिहास के बीच व्यक्ति इस आनंद-पर्व से अनुप्राणित होकर रंग-रस से सराबोर हो उठता है। इस मौसम ने साहित्यकारों को भी अनुप्राणित किया है। यही कारण है कि हिन्दी साहित्य बसंत, फागुन और होली की रचनाओं से भरा पड़ा है! ऐसी ही कुछ चुनिन्दा रचनाओं का संकलन हम धरोहर के दूसर…

कुछ अपनी बात

धरोहर! नामचीन साहित्यकारों की रचनाओं के संकलन की एक नयी श्रंखला इस अंक के साथ हम शुरू करने जा रहे हैं. इस श्रंखला का नाम होगा- ‘धरोहर’. इसके तहत साहित्य की अलग-अलग विधाओं पर केन्द्रित ऐसे अंक हम समय-समय पर आपके समक्ष प्रस्तुत करेंगे जिनमें नामचीन साहित्यकारों की प्रसिद्द रचनाओं का संकलन होगा.  यूँ तो हर अंक में हम ‘नाद अनहद’ नाम से विश्व के प्रसिद्द साहित्यकारों की रचनाओं का प्रकाशन करते रहे हैं लेकिन शायद उतना पर्याप्त नहीं. विश्व साहित्य इतनी कालजयी रचनाओं से भरा पड़ा है कि उन्हें कुछ पन्नों के सहारे समेट पाना असंभव है, इसलिए इस अंक के साथ हम विशेषांकों की इस नयी श्रंखला को शुरुआत कर रहे हैं जिसमें विधा विशेष की प्रसिद्द रचनाओं को अपने पाठकों के लिए उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा. यह पहला अंक कहानी विधा पर केन्द्रित है और एक प्रयोग के तौर पर केवल ६ कहानियों को सम्मिलित करते हुए इस अंक को आपके समक्ष प्रस्तुत किया गया है. इस अंक पर आपके सुझावों की हमें प्रतीक्षा रहेगी. आपके मार्गदर्शन की सहायता से हम आगामी विशेषांकों को और बेहतर बनाने का प्रयास करेंगे. 
- बृजेश नीरज