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नाजिम हिकमत की कविताएँ

नाजिम हिकमत
आशावाद कविताएँ लिखता हूँ मैं वे छप नहीं पातीं लेकिन छपेंगी वे. मैं इंतजार कर रहा हूँ खुश-खैरियत भरे खत का शायद वो उसी दिन पहुँचे जिस दिन मेरी मौत हो लेकिन लाजिम है कि वो आएगा. दुनिया पर सरकारों और पैसे की नहीं बल्कि अवाम की हुकूमत होगी अब से सौ साल बाद ही सही लेकिन ये होगा ज़रूर. (अंग्रेजी से अनुवाद- दिगम्बर)
मैं तुम्हें प्यार करता हूँ
घुटनों के बल बैठा- मैं निहार रहा हूँ धरती, घास, कीट-पतंग, नीले फूलों से लदी छोटी टहनियाँ. तुम बसंत की धरती हो, मेरी प्रिया, मैं तुम्हें निहार रहा हूँ. पीठ के बल लेटा- मैं देख रहा हूँ आकाश, पेड़ की डालियाँ, उड़ान भरते सारस, एक जागृत सपना. तुम बसंत के आकाश की तरह हो, मेरी प्रिया, मैं तुम्हें देख रहा हूँ. रात में जलाता हूँ अलाव- छूता हूँ आग, पानी, पोशाक, चाँदी. तुम सितारों के नीचे जलती आग जैसी हो, मैं तुम्हें छू रहा हूँ. मैं काम करता हूँ जनता के बीच- प्यार करता हूँ जनता से, कार्रवाई से, विचार से, संघर्ष से.

नाजिम हिकमत की कविताएँ

मनहूस आज़ादी तुम बेच देते हो – अपनी आँखों की सतर्कता, अपने हाथों की चमक.  तुम गूंथते हो लोइयाँ जिंदगी की रोटी के लिये,  पर कभी एक टुकड़े का स्वाद भी नहीं चखते तुम एक गुलाम हो अपनी महान आजादी में खटनेवाले.  अमीरों को और अमीर बनाने के लिये नरक भोगने की आज़ादी के साथ तुम आजाद हो! 
जैसे ही तुम जन्म लेते हो, करने लगते हो काम और चिंता,  झूठ की पवनचक्कियाँ गाड़ दी जाती हैं तुम्हारे दिमाग में.  अपनी महान आज़ादी में अपने हाथों से थाम लेते हो तुम अपना माथा.  अपने अन्तःकरण की आजादी के साथ तुम आजाद हो! 
तुम बेहद प्यार करते हो अपने देश को,  पर एक दिन, उदाहरण के लिए, एक ही दस्तखत में उसे अमेरिका के हवाले कर दिया ज़ाता है और साथ में तुम्हारी महान आज़ादी भी.  उसका हवाईअड्डा बनने की अपनी आजादी के साथ तुम आजाद हो! 
तुम्हारा सिर अलग कर दिया गया है धड़ से.  तुम्हारे हाथ झूलते है तुम्हारे दोनों बगल.  सड़कों पर भटकते हो तुम अपनी महान आज़ादी के साथ.  अपने बेरोजगार होने की महान आज़ादी के साथ तुम आजाद हो! 
वालस्ट्रीट तुम्हारी गर्दन ज़कड़ती है ले लेती है तुम्हें अपने कब्ज़े में.  एक दिन वे भेज सकते हैं तुम्हें कोरिया,  ज़हाँ अपनी महान आजादी के साथ त…