Skip to main content

Posts

Showing posts with the label मंजु शर्मा

एक सवाल

अँधेरों में जब लिपटी थी रूह मेरी
तुम आए एक रौशनी बनकर
थी चारों तरफ स्याही निराशा की
तुम आए थे उम्मीद बनकर
अमावस की रात मैं थी बनी हुई
तुम आए तब पूर्णिमा का चाँद बनकर
सुलझाने लग गयी मैं जब पहेलियाँ
सवाल बना दिया तुमने परिचय मुझसे तेरा
करने लगी थी मैंमुस्कुराने की कोशिश
तुम चले गए क्यों रूठे हुए, अजनबी बनकर - मंजु शर्मा