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मनोहर अभय के नवगीत

(1) औरतरसातेरहे
कुनवापरस्तीमेंलगीथीधूपबूढ़ी कुनमुनेकिसलयठगे फूलथेबासी/औरमुरझातेरहे.
नवगीतलिखनाचाहते लिखगएकव्वालियाँ शर्मसारीपरनिरंतर पिटरही