Skip to main content

Posts

Showing posts with the label कल्पना रामानी

कल्पना रामानी के नवगीत

         कल्पना रामानी
धूप सखी 
धूप सखी, सुन विनती मेरी, कुछ दिन जाकर शहर बिताना। पुत्र गया धन वहाँ कमाने, जाकर उसका तन सहलाना।
वहाँ शीत पड़ती है भारी। कोहरा करता चौकीदारी। तुम सूरज की परम प्रिया हो, रख लेगा वो बात तुम्हारी।
दबे पाँव चुपचाप पहुँचकर, उसे प्रेम से गले लगाना।
रात, नींद जब आती होगी साँकल शीत बजाती होगी छिपे हुए दर दीवारों पर, बर्फ हर्फ लिख जाती होगी।
सुबह-सुबह तुम ज़रा झाँककर, पुनः गाँव की याद दिलाना।
मैं दिन गिन-गिन जिया करूँगी। इंतज़ार भी किया करूँगी। अगर शीत ने मुझे सताया, फटी रजाई सिया करूँगी।
लेकिन यदि हो कष्ट उसे तो, सखी! साथ में लेती आना।   ------------------ गुलमोहर की छाँव
गुलमोहर की छाँव, गाँव में काट रही है दिन एकाकी।
ढूँढ रही है उन अपनों को, शहर गए जो उसे भुलाकर। उजियारों को पीठ दिखाई, अँधियारों में साँस बसाकर।
जड़ पिंजड़ों से प्रीत जोड़ ली, खोकर रसमय जीवन-झाँकी।
फल वृक्षों को छोड़ उन्होंने, गमलों में बोन्साई सींचे। अमराई आँगन कर सूने, इमारतों में पर्दे खींचे।
भाग दौड़ आपाधापी में, बिसरा दीं बातें पुरवा की। 
बंद बड़ों की हुई चटाई, खुली हुई है केवल खिड़की। किसको वे आवाज़ लगाएँ, किसे सुनाएँ …

हमारे रचनाकार- कल्पना रमानी

६ जून १९५१ को उज्जैन में जन्मी कल्पना रामानी ने हालांकि हाई स्कूल तक ही औपचारिक शिक्षा प्राप्त की परन्तु उनके साहित्य प्रेम ने उन्हें निरंतर पढ़ते रहने को प्रेरित किया। पारिवारिक उत्तरदायित्वों तथा समस्याओं के बावजूद उनका साहित्य-प्रेम बरकरार रहा। वे गीत, गजल, दोहे कुण्डलिया आदि छंद-रचनाओं में विशेष रुचि रखती हैं। उनकी रचनाएँ पत्र-पत्रिकाओं और अंतर्जाल पर प्रकाशित होती रहती हैं। वर्तमान में वे वेब की सर्वाधिक प्रतिष्ठित पत्रिका ‘अभिव्यक्ति-अनुभूति’के संपादक मण्डल की सदस्य हैं। प्रकाशित कृतियाँ-गीत संग्रह- ‘हौसलों के पंख’
ईमेल- kalpanasramani@gmail.com
नवगीत (१) चलो नवगीत गाएँ
गर्दिशों के भूलकर शिकवे गिले, फिर उमंगों के चलो नवगीत गाएँ।
प्रकृति आती रोज़ नव शृंगार कर। रूप अनुपम, रंग उजले गोद भर।
जो हमारे हिय छुपा है चित्रकार, भाव की ले तूलिका उसको जगाएँ।
झोलियाँ भर ख़ुशबुएँ लाती हवा। मखमली जाजम बिछा जाती घटा।
ख़्वाहिशों के, बाग से चुनकर सुमन,