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Showing posts from March, 2013

किस किस अदा से तूने जलवा दिखा के मारा

- अकबर इलाहाबादी किस-किस अदा से तूने जलवा दिखा के मारा आज़ाद हो चुके थे, बन्दा बना के मारा
अव्वल बना के पुतला, पुतले में जान डाली फिर उसको ख़ुद क़ज़ा की सूरत में आ के मारा
आँखों में तेरी ज़ालिम छुरियाँ छुपी हुई हैं देखा जिधर को तूने पलकें उठाके मारा
ग़ुंचों में आके महका, बुलबुल में जाके चहका इसको हँसा के मारा, उसको रुला के मारा
सोसन की तरह 'अकबर', ख़ामोश हैं यहाँ पर नरगिस में इसने छिप कर आँखें लड़ा के मारा शब्दार्थ: 1.  अव्वल - पहले 2.  क़ज़ा - मौत 3.  सोसन - एक कश्मीरी पौधा

छोड़ दि‍या हमने भी ....

छोड़ दि‍या हमने भी ....: (((...TODAY IS NO SMOKING DAY...))) चल.... आज अंति‍म बार तेरी याद को तेंदू पत्‍ते में भर कस कर  एक धागे से लपेट दूं और सुलगा के उसे लगा...

एक थी गौरैया .

Tere bin: अब की सजन मैं ..होली.....

रचनाकार: विजय शिंदे का आलेख - निरक्षरता से... मुक्ति तक का अद्भुत सफर

Shabd Setu: तेरा यह क्रमशः टूटना

ग़ज़ल गंगा: ग़ज़ल::   मिली दौलत , मिली शोहरत , मिला है मान उसको क्यों  मौका जानकर अपनी जो बात बदल जाता है  . किसी का दर्...

मेरा मन: पृथिवी (कौन सुनेगा मेरा दर्द ) ?

भूली-बिसरी यादें : कट गयी दीवार:   गर्दे हैरत से अट  गयी दीवार, आइना देख कट गयी दीवार।   लोग  वे मंजरों से डरा करते थे , अब के काया पलट गयी दीवार,  ...

रूप-अरूप

इधर हालांकि बहुत समय नहीं दे सका फिर भी जितना भी समय मिल सका उसमें कुछ ऐसी रचनायें पढ़ने को मिलीं जो दिल को छू गयीं। ऐसी रचनाओं के लिंक आपकी सेवा में प्रस्तुत हैं-

रूप-अरूप: यादों के फूल.....: मुझे बेहद पसंद है् पलाश के फूल...जब भी देखती हूं.....बि‍ना पत्‍ते के लाल-लाल.....दग्‍ध पलाश, मुझे लगता है इसके पीछे कोई ऐसी कहानी रही...

मेरी धरोहर: ये तो सोचो तुम्हारी बच्ची है..........अन्सार कम्बर...: थोड़ी झूठी है, थोड़ी सच्ची है हाँ ! मगर बात बहुत अच्छी है मैं तेरी उम्र बताऊँ कैसे थोड़ी पक्की है, थोड़ी कच्ची है तू है कैसी मैं...

Zindagi se muthbhed: अज़ीज़ जौनपुरी : मेरे चेहरे को अपना कहा कीजिए:     मेरे चेहरे को अपना कहा कीजिए                   मेरी   गजलों   को   थोड़ा   पढ़ा कीजिए           आईना  देख  शर्मा   फिर   हँसा  कीजिए...

रूप-अरूप: जलते कपूर सा मेरा प्रेम....: दीप्‍त..प्रज्‍जवलि‍त पान के पत्‍ते पर जलते कपूर सा मेरा प्रेम जो ति‍रना चाहता है अंति‍म क्षण तक जलना चाहता है और तुम चंचल नदी की तरह मुझ...

"घर के दरमियाँ" | भूली-बिसरी यादें

रूप-अरूप: बता दो अपनी यादों को.....: कौन करे…

संकलन

साहित्यकेक्षेत्रमेंकईप्रयासचलरहेहैं।हिन्दीसाहित्यकोपरिमार्जितऔरसमृद्धशालीबनानेवालेइनप्रयासोंकोनमनकरतेहुएउनसेचुनेकुछलिंक्सयहांदिएजारहेहैं।इननवीनप्रयासोंकाआनंदलीजिए-
1- hum sab kabeer hain: देवीनागरानीकीदोग़ज़लें
2- रचनाकार: शालिनीमाथुरकाआलेख - औरतकेनज़रियेसे :  मृतात्माओंकाजुलूस
3- अंधड़ !: येख्यालअच्छाहै !
4- मेरीधरोहर: रातभरजागेहैं........... डा०श्रीमतीतारासिंह
5- ग़ज़लगंगा: ग़ज़ल

कुछ दोहे नीरज के

गोपालदास"नीरज"  (1)
मौसमकैसाभीरहेकैसीचलेबयार
बड़ाकठिनहैभूलनापहला-पहलाप्यार (2)
भारतमाँकेनयनदोहिन्दू-मुस्लिमजान
नहींएककेबिनाहोदूजेकीपहचान (3)
बिनादबायेरसनदेंज्योंनींबूऔरआम
दबेबिनापूरेनहोंत्योंसरकारीकाम (4)
अमरीकामेंमिलगयाजबसेउन्हेंप्रवेश
उनकोभाताहैनहींअपनाभारतदेश (5)
जबतककुर्सीजमेखालूऔरदुखराम