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Showing posts from February, 2013

भूली-बिसरी यादें

दूरियाँ | भूली-बिसरी यादें

स्वप्न मेरे...........: माँ ... एक रूप

मेरी धरोहर: लौटकर कब आते हैं???????.........प्रीति सुराना: सपने हैं घरौंदे, जो उजड़ जाते हैं,.... मौसम हैं परिन्दे, जो उड़ जाते हैं,.... क्यूं बुलाते हो, खड़े होकर बहते हुए पानी में उसे...

hum sab kabeer hain: टूटा मन


भूली-बिसरी यादें : तकदीर के मारे:                          तूफां से डरकर लहरों के बीच  सकारे   कहाँ जाएँ,              इस जहाँ में भटककर तकदीर के मारे कहाँ जाएँ ।...

डॉ. हीरालाल प्रजापति: 43. ग़ज़ल : पूनम का चाँद...................

परिकल्पना: उत्थिष्ठ भारत

स्वप्न मेरे...........: वो एक लम्हा ...

फूल | भूली-बिसरी यादें

दोहे

-फ़िराक़ गोरखपुरी नया घाव है प्रेम का जो चमके दिन रात होनहार बिरवान के चिकने चिकने पात
यही जगत की रीत है, यही जगत की नीत मन के हारे हार है, मन के जीते जीत
जो न मिटे ऐसा नहीं कोई भी संजोग होता आया है सदा मिलन के बाद वियोग
जग के आँसू बन गए निज नयनों के नीर अब तो अपनी पीर भी जैसे पराई पीर
कहाँ कमर सीधी करे, कहाँ ठिकाना पाय तेरा घर जो छोड़ दे, दर दर ठोकर खाय
जगत धुदलके में वही चित्रकार कहलाय कोहरे को जो काट कर अनुपम चित्र बनाय
बन के पंछी जिस तरह भूल जाय निज नीड़ हम बालक सम खो गए, थी वो जीवन भीड़
याद तेरी एकान्त में यूँ छूती है विचार जैसे लहर समीर की छुए गात सुकुमार
मैंने छेड़ा था कहीं दुखते दिल का साज़ गूँज रही है आज तक दर्द भरी आवाज़
दूर तीरथों में बसे, वो है कैसा राम मन मन्दिर की यात्रा, मूरख चारों धाम
वेद, पुराण और शास्त्रों को मिली न उसकी थाह मुझसे जो कुछ कह गई, इक बच्चे की निगाह

रात

- उदयप्रकाश इतनेघुप्पअंधेरेमें
एकपीलीपतंग
धीरे-धीरे
आकाशमेंचढ़रहीहै.

किसीबच्चेकीनींदमेंहै
उसकीगड़ेरी

किसीमाँकीलोरियोंसे
निकलतीहैडोर!

तिब्बत

- उदयप्रकाशतिब्बतसेआयेहुए लामाघूमतेरहतेहैं

आजकलमंत्रबुदबुदाते उनकेखच्चरोंकेझुंड
बगीचोंमेंउतरतेहैं

गेंदेकेपौधोंकोनहींचरते गेंदेकेएकफूलमें
कितनेफूलहोतेहैं

पापा? तिब्बतमेंबरसात
जबहोतीहै

तबहमकिसमौसममें

धरोहर

साहित्य एक विशाल सागर है जिसमें जितना डूबो उतना और गहरे जाने का मन होता है। इस विशाल सागर से कुछ मोती आपके सामने लिंक के रूप में प्रस्तुत हैं। आशा है आप आनंद उठाएंगे।
शुरूआत ऐसे रचनाकार से जो लिखते तो बहुत दिनों से हैं लेकिन गुपचुप। अभी कुछ दिनों पहले ही इन्होंने अपनी रचनायें सबके सामने लानी शुरू की हैं। ये हैं सण्डीला, हरदोई, उत्तर प्रदेश के रहने वाले मो आरिफ सण्डीलवी।

Urdu-Hindi Poetry: राम कहानी: वो चांद सी सूरत नामे-खुदा, वो उठती जवानी क्या कहिए दिल ले गयी बातों बातों में, ये ज़हर बयानी क्या कहिए कुछ हंस के कटी कुछ रो के...

मेरी धरोहर: छोड़ो मेरे दर्दे-ए-दिल की फिक्र तुम.........अधीर: यहॉ कब कौन किसका हुआ है , इंसान जरुरत से बंधा हुआ है । मेरे ख्वाबो मे ही आते है बस वो, पाना उसको सपना बना हुआ है। सुनो,पत्थर द...

खुद को पाना जरूर Khud ko pana jarur | Life is Just a Life

मेरी धरोहर: सुकूं बांकपन को तरसेगा...............................: एक निवेदनः कोई सामान घर में एक कागज में पेक करके लाया गया वह कागज मेरी नजर में आया, उसी कागज में ये ग़ज़ल छपी हुई थी, पर श...

उच्चारण: "ग़ज़ल-खो…

अनुकूल वातावरण

- दुष्यन्त कुमारउड़ते हुए गगन मेंपरिन्दों का शोर दर्रों में, घाटियों मेंज़मीन परहर ओर...एक नन्हा-सा गीतआओइस शोरोगुल मेंहम-तुम बुनें, और फेंक दें हवा में उसको ताकि सब सुने, और शान्त हों हृदय वेजो उफनते हैंऔर लोग सोचेंअपने मन में विचारेंऐसे भी वातावरण में गीत बनते हैं।

एक नया रचनाकार

आइएआपकापरिचयकरातेहैंएकनयेरचनाकारकीलेखनीसे।येहैंचंद्रेशकुमारछतलानी।जनार्दनरायनागरराजस्थानविद्यापीठमेंसहायकआचार्यपदपरकार्यरतछतलानीजीकंम्प्यूटरविशेषज्ञहोनेकेसाथसाहित्यमेंभीअच्छीपकड़रखतेहैं।
यहांप्रस्तुतहैछतलानीजीकीलेखनीसेनिकलीएककहानी।कृपयाइसेपढ़ेंऔरअपनेसुझावदें।


सच की तस्वीर

     आनंद जी अनमने मन से हर तस्वीर को देखते जा रहे थे| विद्यालय के प्रिंसिपल महोदय उनके साथ थे और सारे विद्यार्थी सांस रोके इस प्रतीक्षा में थे कि, जिसकी बनाई तस्वीर को प्रथम पुरस्कार मिलेगा, उसके

देखा हर एक शाख पे

- फ़िराक़गोरखपुरी देखाहरएकशाखपेगुंचोकोसरनिगूँ१.
जबआगईचमनपेतेरेबांकपनकीबात.

जाँबाज़ियाँतोजीकेभीमुमकिनहैदोस्ती.
क्योंबार-बारकरतेहोदारों-दसन२कीबात.

बसइकज़रासीबातकाविस्तारहोगया.
आदमनेमानलीथीकोईअहरमन३कीबात.

पड़ताशुआ४माह५पेउसकीनिगाहका.
कुछजैसेकटरहीहोकिरन-से-किरनकीबात.

खुशबूचहारसम्त६उसीगुफ्तगू