Skip to main content

Posts

Showing posts from October, 2013

देखता हूँ अंधेरे में अंधेरा

- नरेश सक्सेना
लाल रोशनी न होने का अंधेरा
नीली रोशनी न होने के अंधेरे से अलग होता है इसी तरह अंधेरा अंधेरे से अलग होता है।
अंधेरे को दोस्त बना लेना आसान है उसे अपने पक्ष में भी किया जा सकता है सिर्फ उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। भरोसा रोशनी पर तो हरगिज़ नहीं हरी चीज़ें लाल रोशनी में काली नज़र आती हैं दरअसल चीज़ें खुद कुछ कम शातिर नहीं होतीं वे उन रंगों की नहीं दिखतीं जिन्हें सोख लेती हैं बल्कि उन रंगों की दिखाई देती हैं जिन्हें लौटा रही होती हैं वे हमेशा अपनी अस्वीकृति के रंग ही दिखाती हैं
औरों की क्या कहूं मेरी बायीं आंख ही देखती है कुछ और दायीं कुछ और देखती है बायां पांव जाता है कहीं और दायां, कहीं और जाता है पास आओ दोस्तों अलग करें सन्नाटे को सन्नाटे से अंधेरे को अंधेरे से और नरेश को नरेश से।

प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा की कविता

हिंदी दिवस 


जो अनुभूतियां 
कभी हम जीते थे 
अब उन्हीं के 
स्मृति कलश सजाकर
प्रतीक रूप में चुन चुनकर
नित दिवस मनाते हैं

परम्परा तो स्वस्थ है
भावनाओं के 
इस रेगिस्तान में
इसी बहाने
मंद बयार का एहसास
ये दिवस दे जाते हैं।


 प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा 

शशि पुरवार की लघुकथा

मानसिकपतन        भोपालजानेकेलिएबसजल्दीपकड़ीऔरआगेकीसीटपरसामानरखाथाकिकिसीकेजोर-जोरसेरोनेकीआवाजआई, मैंनेदेखाएकभद्रमहिलाछातीपीट -पीटकरजोर-जोरसेरोरही

संकलन

सभी मित्रों को मेरा नमस्कार!
आज आपके समक्ष कुछ लिंक्स लेकर उपस्थित हूँ. तो देखिये, आज के लिंक्स-


अरुण कुमार निगम (हिंदी कवितायेँ):  छत्तीसगढ़ी काव्य में अमर कवि कोदूराम ‘दलित’:  28 सितम्बर : 46 वीं पुण्य तिथि पर विशेष -विनोद साव (अमर किरण में 28 सितम्बर 1989 को प्रकाशित) साहित्यकार का सबसे अच्छा...

"कुछ कहना है"  काली कॉफ़ी पीजिये, कट जाने दो नाक लाशों पर टेबुल सजे, बैठे भारत पाक |  काली कॉफ़ी पीजिये, कट जाने दो नाक |  कट जाने दो नाक, करें हमले वे दैनिक |  मरती जनता आम, मरें...

शंखनाद:  नाभि अथवा नाभिचक्र का टलना और उसका परिक्षण करना !!:  मानव शरीर में स्थित बहतर हजार नाड़ियों का उदगम केन्द्र " नाभिचक्र" का योग और आयुर्वेद में बड़ा महत्व है ! नाभिमण्डल हमारे...

satyam shivam sunderam jyotish sansthan:  तर्पण विधि:  तीन कुशाओं को बाँधकर ग्रन्थी लगाकर कुशाओं का अग्रभाग पूर्व में रखते हुए दाहिने हाथ में जलादि लेकर संकल्प पढ़ें।...

Wings of Fancy:  बत्तख और भैंस/बाल कहानी: तालाब की लहराती लहरों में किलकारियां करती हुई भैंस को देख पास में तैरती बत्तख ने पूछा- ''बहन आज बहुत खुश लग…