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Showing posts from September, 2013

गौरव या हीनता??

सादर वन्दे सुहृद मित्रों... हिन्दी दिवस...हिन्दी पखवाड़ा...फिर धीरे धीरे जोश टांय-टांय फिस्स! शुभप्रभात, शुभरात्रि, शुभदिन सभी को good morning, good night & good day दबाने लगे। आज बच्चों के लिए (क्योंकि बच्चे हिन्दी के शब्दों से परिचित नहीं या फिर उनका अंग्रेजी शब्दकोष बढाने के लिए) बेचारे बुजुर्गों और शुद्ध हिंदीभाषी लोगों को भी अंग्रेजी बोलने के लिए अपनी जिव्हा को अप्रत्याशित ढंग से तोड़ना मरोड़ना पड़ता ही है। उन्हें गांधी जी का वक्तव्य कौन स्मरण कराए जो कहा करते थे- ''मैं अंग्रेजी को प्यार करता हूँ लेकिन अंग्रेजी यदि उसका स्थान हड़पना चाहती है, जिसकी वह हकदार नहीं है तो मैं सख्त नफरत करूंगा।'' अध्ययन का समय ही कहाँ है अब किसी के पास जो महापुरुषों के सुवचनों को संज्ञान में आये। ईश्वर ही बचाए समाज को। 14सितम्बर 1949 को संविधान सभा मे एकमत होकर निर्णय लिया गया कि भारत की राजभाषा हिन्दी होगी। इसी महत्वपूर्ण निर्णय को प्रतिपादित करने तथा हिंदी को हर क्षेत्र में प्रसारित करने के लिए ''राष्ट्र-भाषा प्रचार समिति वर्धा'' के अनुरोध पर 1953 से सम…

पतवार

सभी मित्रों को मेरा नमस्कार!
आप सब के लिए कुछ चुनिन्दा लिंक्स लेकर आज उपस्थित हूँ. तो, आइये सीधे चलते हैं लिंक्स पर-

नवगीत की ओर: पतवार भारती हिन्दी है भाग्य विधाता भारत की, पतवार भारती हिन्दी है।   अंचल अंचल की उन्नति का, द्वार भारती हिन्दी है।...

दोहे: माँ सम हिन्दी भारती माँ सम हिन्दी भारती, आँचल में भर प्यार।  चली विजय-रथ वाहिनी, सात समंदर पार।    सकल भाव इस ह्रदय के, हिन्दी पर कुर...

अंतर्मन : बेटों पर भी निगाह रखना जरूरी वो बार- बार घड़ी देखती और बेचैनी से दरवाजे  की तरफ देखने लगती| ५ बजे ही आ जाना था उसे अभी तक नही आया, कोचिंग के टीचर को भी फोन कर चुकी...

नवगीत: सिसक रही हिरनी डा0 जगदीश व्योम  राजा मूँछ मरोड़ रहा है  सिसक रही हिरनी  बड़े-बड़े सींगों वाला मृग  राजा ने मारा  किसकी यहाँ मजाल  कहे राजा को...

त्रिवेणी: प्रिय परछाइयाँ !

जीवन संध्या(गीत, गज़ल): मंगल मूरत गणपति देवा देवों में जो पूज्य प्रथम है, शीघ्र सँवारे सबके काम।  मंगल मूरत गणपति देवा, है वो पावन प्यारा नाम।...
अब आज्ञा दीजिये! नमस्कार!

जय जय भारत: श्रद्धान्जलि

सादर अभिनन्दन सुहृद साहित्य प्रेमियों...
        मित्रों कहते हैं न कि अभिव्यक्ति पूर्णरूप से स्वतन्त्र होती है। लेकिन आप सहमत हैं इससे? भले ही स्वतन्त्र हो परन्तु सलमान रुश्दी, तसलीमा नसरीन जैसे कई महान साहित्यकारों को प्रतिबन्ध की कठोरतम् बेड़ियों से लड़ना पड़ा, देश छोड़ना पड़ा, अज्ञातवास, भूमिगत रहना पड़ा...और भी न जाने क्या क्या! लेकिन लेखनी/अभिव्यक्ति में किंचित भी कमजोरी की झलक नहीं दिखाई पड़ी। दोस्तों कोई गुण, विशेषतय: साहित्यधर्मिता को कभी कोई भी परिस्थित पंगु नहीं बना सकती।        ऐसी ही हमारे देश की प्रतिष्ठित लेखिका सुष्मिता बनर्जी, संघर्ष कभी जिनके पथ के रोड़े-नहीं बन पाए। सुष्मिता तालिबान मुक्ति के पश्चात लिखी गई पुस्तक 'काबुलीवालाज बंगाली वाइफ' बहुचर्चित रही। गत गुरुवार को उनकी अफगान में बहुत दर्दनाक ढंग से काल के गाल में ढूंस दिया गया। आज मैंनें उनकी ही याद में कुछ ऐसे ही साहित्य/साहित्यकारों को शामिल करने का प्रयास किया जिन्होंने विदेश में पैठ ही नही बनाई बल्कि सम्मान भी पाया। आशा है, आप उन्हें अपना स्नेह और शुभकामनाएं जरूर समर्पित करेंगे, जिससे हमारे आत्मीय सा…

अन्नपूर्णा बाजपेयी का आलेख

सहस्त्र्म तु पितृन माता गौरवेणातिरिच्यते
 मनु स्मृति में कहा गया है की दस उपाध्यायों से बढ़कर एक आचार्य होता है, सौ आचार्यों से बढ़कर एक पिता होता है और एक हजार पिताओं से बढ़ कर एक माँ होती है। माँ को संसार में सबसे बड़े एवं सर्वप्रथम विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया है। संतान को जो शिक्षा और संस्कार माँ देती है, वह कोई भी संस्था या विद्यालय नहीं दे सकता। माता के गर्भ से ही यह प्रशिक्षण प्रारम्भ हो जाता है और निरंतर जारी रहता है। हमारे शास्त्रों मे अनेक प्रमाण मिलते है कि माता द्वारा दी गई शिक्षा से संतान को अद्वितीय उपलब्धियां मिली है। वीर अभिमन्यु ने माता के गर्भ में ही चक्रव्यूह भेदन की विद्या सीख ली थी। शुकदेव मुनि को सारा ज्ञान माँ के गर्भ में ही प्राप्त हो गया था और संसार में आते ही वे वैरागी हो घर त्याग कर चल दिये थे ।

       श्री राम चरित मानस में माता सुमित्रा के उपदेश का बड़ा ही मार्मिक प्रसंग आया है जिसको गोस्वामी तुलसीदास जी ने इन पंक्तियों मे प्रस्तुत किया है – रागु रोषु इरिषा मद मोहू ।  जनि सपनेहु इन्ह के बस होहू ॥ सकल प्रकार विकार बिहाई ।  मन क्रम बचन करेहू सेवकाई ॥ जेहि न रामु…

छिनता सुकून : निर्झर टाइम्स

"जय माता दी" अरुन की ओर से आप सबको सादर प्रणाम . निर्झर टाइम्स में आप सभी का हार्दिक स्वागत है आइये चलते हैं आप सभी के चुने हुए सूत्रों पर. छिनता सुकून Vibha Rani Shrivastava
मन का तार सितार हुआ है डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा
अपना देश :) संजय भास्‍कर
हथेलियां...जो आजकल खुली रहती हैं Pratibha Katiyar
दो प्रेमी.. वसुंधरा पाण्डेय
मृत्तिका Sushila
शिक्षक के सम्मान मे गिरावट या वृद्धि?? Vandana Tiwari
तेरा वंदन Vdaya Veer Singh
सावन आयो रे ANA
'गुरू जी मारे धम-धम..विद्या आए छम-छम' रश्मि शर्मा
फोटोग्राफी सीखे इस वेबसाइट से Hitesh Rathi इसी के साथ मुझे इजाजत दीजिये मिलते हैं फिर मिलेंगे आप सभी के चुने हुए प्यारे लिंक्स के साथ. तब तक के लिए शुभ विदा स्वस्थ रहें मस्त रहें खुशियों में व्यस्त रहें.

शिक्षक दिवस पर आरती शर्मा का लेख

प्रिय पाठकों, सादर नमस्कार! जैसा की आप सभी जानते है, आने वाले वाले ५ सितम्बर को शिक्षक दिवस के रूप में हर साल मनाया जाता है. यह दिन आते ही मुझे अपने विद्यालय मे बिताये हर लम्हे याद आ जाते है. वो बचपन, वो सहेलियां वो पसंदीदा शिक्षक और उनसे जुड़ी हर वो बात जिसने मेरे जीवन पर बहुत ही गहरा प्रभाव छोड़ा है. उस समय तो हमे शिक्षक की डांट भी बहुत बुरी लगती थी, लेकिन अब जब हमारा सामना वास्तविकता से हो चुका है और भले बुरे का भी काफी हद तक ज्ञान हो चुका तो याद आता है हम कितने अज्ञानी थे की एक अच्छे शिक्षक की हमें पहचान नही थी. यदि वह हमे डांटता या मारता था तो उसके पीछे कहीं न कहीं हमारी ही भलाई होती थी. आज चाहकर भी वो दिन वापस नहीं आ सकते. आपको अपनी ही एक घटना बताती हूँ जिसने मुझे हिंदी मे प्रथम बना दिया था. यह घटना उस समय की है जब मैं सातवीं कक्षा में थी. जैसा की इस उम्र में होता ही है मुझे अपनी सहेली से बहुत लगाव था. हिंदी का पीरियड था.मैं अपनी सहेली से बातें करने में मशगुल थी. मेरी हिंदी की शिक्षिका का नाम उमा अगरवाल था. मैं इस बात से अनजान थी की मेरी शिक्षिका का ध्यान मेरी तरफ है. उन्होंने मु…

आनन्द भयो..

जय श्री कृष्ण मित्रों! 
मुझे आशा ही नही पूर्ण विश्वास है आपने यह सप्ताह बड़ी धूम के साथ मनाया होगा। एक तो अपने नटखट लाला कान्हाके जन्मदिन ने भक्तिरस में सराबोर किया, दूजे कल यानि 31 अगस्त महान साहित्यकारा अमृता प्रीतम जी का जन्मदिन। 
सभी लोग अपने अंदाज में खुशियों संवेदनाओं का इज़हार करते हैं। हम साहित्य से ताल्लुक रखते हैं तो हमारी लेखनी की गमक भी डोल, नगाड़े से कम थोड़ी है। 
आइये, चलते हैं आज के संकलित सूत्रों पर और आनन्द लेते आपकी लेखनीकृत संगीत का-



हृदयांजलि 
हिंदू धर्म पर सारे सवालों के जवाब- इंसाक्लोपीडिया ऑन हिंदूइज्म प्रकाशित

Voice of Silent Majority
तरही गज़ल पेट खाली हैं मगर भूख जताये न बने पीर बढ़ती ही रहे  पर वो सुनाये न बने ढूंढते हैं कि किरन इक तो नजर आए कोई रात गहरी हो ... 


जीवन संध्या(गीत, गज़ल)
बुला रही फुहार है //ग़ज़ल// : बदलती ऋतु की रागिनी , सुना रही फुहार है।   उड़ी सुगंध बाग में, बुला रही फुहार है।     कहीं घटा घनी-घनी , कहीं पे धूप... 


अंतर्मन
रानी दी की व्यथा -मीना पाठक         रानी दी             बहुत दिनों बाद मै अपने मायके (गाँव) जा रही थी |  बहुत खुश थी …