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ISSN : 2349-7122

Tuesday, 6 November 2012

रहिये अब ऐसी जगह चल कर जहाँ कोई न हो



रहिये अब ऐसी जगह चल कर जहाँ कोई हो





- ग़ालिब

रहिये अब ऐसी जगह चलकर जहाँ कोई हो 
हमसुख़न कोई हो और हमज़बाँ कोई हो 
बेदर--दीवार सा इक घर बनाया चाहिये 
कोई हमसाया हो और पासबाँ कोई हो 
पड़िये गर बीमार तो कोई हो तीमारदार 
और अगर मर जाईये तो नौहाख़्वाँ कोई हो
 


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