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उदय प्रकाश की दो कविताएँ

उदय प्रकाश

(१)
पिंजड़ा 

चिड़िया
पिंजड़े में नहीं है.

पिंजड़ा गुस्से में है
आकाश ख़ुश.

आकाश की ख़ुशी में
नन्हीं-सी चिड़िया
उड़ना
सीखती है.
-  -  -  -  -

(२)
दिल्ली

समुद्र के किनारे
अकेले नारियल के पेड़ की तरह है
एक अकेला आदमी इस शहर में.

समुद्र के ऊपर उड़ती
एक अकेली चिड़िया का कंठ है
एक अकेले आदमी की आवाज़

कितनी बड़ी-बड़ी इमारतें हैं दिल्ली में
असंख्य जगमग जहाज
डगमगाते हैं चारों ओर रात भर
कहाँ जा रहे होंगे इनमें बैठे तिज़ारती
कितने जवाहरात लदे होंगे इन जहाजों में
कितने ग़ुलाम
अपनी पिघलती चरबी की ऊष्मा में
पतवारों पर थक कर सो गए होगे.

ओनासिस ! ओनासिस !
यहाँ तुम्हारी नगरी में
फिर से है एक अकेला आदमी

ज्योतिर्मयी पन्त की कहानी

ज्योतिर्मयी पंत
                   लक्ष्मी कृपा
कविता बुआ अपने मायके आईहुई थीं.उनके बड़े बेटेऔर बहू दो बेटियों के माता-पिता बन चुके थे और अब बड़ी बहू बीमारी के कारण माँ नहींबन सकती थी.अतः बुआ बहुत उदास थीं. पर जब छोटी बहू भी एक पुत्री को जन्म दे चुकी तोउनके सब्र का बाँध टूट गया.दुबारा जब बहू उम्मीद से हुई तो बुआ ने अपनी डॉक्टरभतीजी से बच्चे की लिंग जाँच कराने में मदद चाही. इस बात पर सबने उन्हें इतना भला-बुराकहा किनाराज़ होकर उनहोंने सबसे रिश्ते ही तोड़डाले.अब वे टोना-टोटका तथा अन्य दवाओं का प्रयोग करवाना चाहती थी इसलिएअपने गाँव आई थीं किज्योतिषियों और तांत्रिकों की मददली जा सके.एक शाम को गाँव के टीले में रहनेवाले बाबा जी से मशविरा करने पहुँच गई.मनमाने रूपये ऐंठकर बाबा ने कुछ दवाएँ दे दीऔर कह दिया की गर्भ में अगर लड़की हुई तो अपने आप छुटकारा मिल जाएगा. अगले दिन एकज्योतिषी के पास जाकर उसे बेटे-बहू और परिवार के सभी जनों की पत्रियाँ दे आईं. पंडित जी ने कहा कि अतिव्यस्तता के कारण वे एक हफ्ते में सारी बातें बतापायेँगे. बुआ को अब घर लौटने की जल्दी थी ताकि तांत्रिककी दी दवा का प्रयोग कर सकें. बहू को…

तुम अमर, मैं नश्वर

- डा० (श्रीमती) तारा सिंह
प्रिये ! विजननीरमें, चौंकअचानक जबभीमैंनींदसे, उठबैठताजाग देखता,तुमगहनकाननकेतरुतममें अपनेदोनयनोंकाविरहदीपजलाये व्यग्र, व्याकुलघूमरहीहोचुपचाप
इंगितकरतरुओंकापात पूछरहीहो, डालीसे, हे ! मृगमदके

डा० (श्रीमती) तारा सिंह का परिचय

नाम -      डा० (श्रीमती) तारा सिंह शिक्षा:---    एम०बी०ई०एच०, साहित्य रत्न, पी-एच०डी० (ओरियेन्टल लर्निंग) जन्मतिथि---  10 अक्टूबर ,1952 अभिरुचिकविता, ग़ज़ल, सिनेमा गीत, कहानी, उपन्यास आदि लेखन ; साहित्यचर्चाऔरसमाजसेवा संप्रति – संस्थापकअध्यक्ष स्वर्ग विभा (www.swargvibha.in), कार्यकारीअध्यक्ष, साहित्यिक, सांस्कृतिक, कला संगमअकादमी, परियावाँ ; संपर्क – १५०२,सीक्वीनहेरिटेज़, प्लाट- ६,से० – १८, सानपाड़ा, नवीमुम्बई - ४००७०५ दूरभाष -09322991198, 022- 32996316;  09967362087. 08080468596 
email :-  rajivsinghonline@hotmail.com; swargvibha@gmail.com
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