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Showing posts from January, 2016

नवीन मणि त्रिपाठी के मुक्तक

नारी संवेदना
लिपटकफ़नमें आबरू को खोगयी बेटी। बापके कन्धोंपेअर्थीमें सो गयी बेटी।। ये तख्तो-ताज व ताकत बहुत निकम्मी है। अलविदा कहतेरे कानून कोगयीबेटी।।

हमशहादतकेनामपरहिसाबमाँगेंगे। इसहुकूमत से तो वाजिबजबाबमाँगेंगे।। चिताएँ खूबसजा दी हैं आजअबलाकी। हरहिमाकतपेतुझ सेइन्कलाबमाँगेंगे।।

पंखतितलीका कुतर कर गए बयानतेरे। तालिबानीकीशक्ल में हुएफरमानतेरे।। कुर्सियाँ पाके हुएतुम भीबदगुमानबहुत। अस्मतेंसारीलूटलेगए दरबानतेरे।।

लाशझूलीजोदरख्तोंपेशर्मसारहुए। जुर्म<