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Showing posts from July, 2013

धर्म संगम

शुभम् सुहृद मित्रों...
दोस्तों रमज़ान चल रहे हैं, मुस्लिम भाइयों का पवित्र महीना, धर्म कोई भी हो सभी की मूल शिक्षाएं लगभग वही हैं। अब हम किसी धर्म या संस्कृति को प्रतिष्ठा का विषय मान बैठें तो हमारी अज्ञानता ही तो है। हम 'सत्य' को ही ले लें, तो सभी धर्म सभाषी हैं।
हमारा सनातन धर्म कहता है-
''स वै सत्यमेव वदेत् । एतद्धवै देवा'' शतपथ ब्राम्हण (अर्थात् सत्य का अनुशीलन करने वाले देवत्व को प्राप्त होते हैं। 
वहीं पवित्र इस्लाम कहता है- 
''वला तक़ूलूऽअलऽऽलू अल्लाहि-इल्लऽऽल्हक्क''  क़ुरान शरीफ ४/१७९ (अल्हाह की शान में कभी झूठ का प्रयोग मत करो, सदैव सच बोलो।  
सिख धर्म की बात करें तो गुरुनानक जी के वचन हैं- 
 ''रे मन डीगि न डोलियै सीधे मारग धाओ।  पाछे बाधु डराउणा आगै अगिनि तलाओ।।''  बौद्धों का भी मत है- 
''एकं धम्मं अतीतस्स मुसावादिस्स जन्तुनो।''  Bible की सुनें तो- 
''Great is truth and might above all things''  अन्य धर्म ऐसी ही प्रतिध्वन करते हैं, मतलब सभी धर्म एक ही है, इसलिए सभी धर्मों के लिए समान निष्ठा के साथ चलत…

अकाल-दर्शन

- धूमिल
भूखकौनउपजाताहै :
वहइरादाजोतरहदेताहै
यावहघृणाजोआँखोंपरपट्टीबाँधकर
हमेंघासकीसट्टीमेछोड़आतीहै?

उसचालाकआदमीनेमेरीबातकाउत्तर
नहींदिया।
उसनेगलियोंऔरसड़कोंऔरघरोंमें
बाढ़कीतरहफैलेहुएबच्चोंकीओरइशाराकिया
औरहँसनेलगा।

मैंनेउसकाहाथपकड़तेहुएकहा –
'बच्चेतोबेकारीकेदिनोंकीबरकतहैं'
इससेवेभीसहमतहैं
जोहमारीहालतपरतरसखाकर, खानेकेलिए
रसददेतेहैं।
उनकाकहनाहैकिबच्चे
हमेंबसन्तबुननेमेंमदददेतेहैं।

लेकिनयहीवेभूलतेहैं
दरअस्ल, पेड़ोंपरबच्चेनहीं
हमारेअपराधफूलतेहैं
मगर

निर्झर टाइम्स 19 - जुलाई

कुदरत का कानून प्रस्तुतकर्ता : सरिता भाटिया
हुवे पुरुष कुल फेल, पास होता इक-आधा प्रस्तुतकर्ता : रविकर
आध्यात्मिक शब्दों की अर्थ युक्त सूची (आध्यात्मिक शब्दावली ) प्रस्तुतकर्ता : Virendra Kumar Sharma
सुबह एक सपना दिखा उठा तो अखबार में मिला प्रस्तुतकर्ता : सुशील
प्रकृति और मानव प्रस्तुतकर्ता : Shashi Purwar  शब्द सृजन प्रस्तुतकर्ता : Mukesh Kumar Sinha कीमती सलाह -लघु कथा प्रस्तुतकर्ता : Shikha Kaushik सदा साथ होंगे हम - शब्दों के माध्यम से। प्रस्तुतकर्ता : Shashi Purwar आहार बनाम हार प्रस्तुतकर्ता : संगीता स्वरुप ( गीत ) दहेज़ की बलिबेदी........ या ........ जिन्दगी ............??? प्रस्तुतकर्ता : Ranjana Verma

झाड़खंड का दुर्भाग्य !

१५ नवम्बर २००० को बिहार के प्राकृतिक संसाधन से भरपूर वनांचल क्षेत्र को झारखण्ड नाम देकर अलग कर दिया गया. तर्क यह दिया गया कि छोटे राज्य होने से विकास की संभावनाएं बढ़ेगी. अधिकांश उद्योग धंधे और खनिज सम्पदा इसी क्षेत्र में है, बिहार का बाकी हिस्सा मैदानी इलाका है, जहाँ कृषि पैदावार अच्छी होती है.
वस्तुत: राजनैतिक स्तर पर 1949 में जयपाल सिंह के नेतृत्व में झारखंड पार्टी का गठन हुआ जो पहले आमचुनाव में सभी आदिवासी जिलों में पूरी तरह से दबंग पार्टी रही। जब राज्य पुनर्गठन आयोग बना तो झारखंड की भी माँग हुई जिसमें तत्कालीन बिहार के अलावा उड़ीसा और बंगाल का भी क्षेत्र शामिल था। आयोग ने उस क्षेत्र में कोई एक आम भाषा न होने के कारण झारखंड के दावे को खारिज कर दिया। 1950 के दशकों में झारखंड पार्टी बिहारमें सबसे बड़ी विपक्षी दल की भूमिका में रहा, लेकिन धीरे धीरे इसकी शक्ति में क्षय होना शुरु हुआ। आंदोलन को सबसे बड़ा आघात तब पहुँचा, जब 1963 में जयपाल सिंह ने झारखंड पार्टी को बिना अन्य सदस्यों से विचार विमर्श किये कांग्रेस में विलय कर दिया। इसकी प्रतिक्रिया स्वरुप छोटानागपुर क्षेत्र में कई छोटे-छोटे झ…

बहू जो बन गई बेटी

आज तो सुबह सुबह ही पड़ोस के मोहन बाबू के घर से लड़ने झगड़ने की जोरजोर से आवाजें आने लगी| लो जी, आज के दिन की अच्छी शुरुआत हो गई सास बहूकी तकरार से| ऐसा क्यों होता है जिस बहू को हम इतने चाव और प्यार से घरले कर आते है, फिर पता नही क्यों और किस बात से उसी से न जाने किस बात सेनाराजगी हो जाती है| जब मोहन बाबू के इकलौते बेटे अंशुल की शादी एक, पढ़ीलिखी संस्कारित परिवार की लड़की रूपा से हुई थी तो घर में सब ओर खुशियोंकी लहर दौड़ उठी थी| मोहन बाबू ने बड़ी ईमानदारी और अपनी मेहनत की कमाई
से अंशुल को डाक्टर बनाया| मोहन बाबू की धर्मपत्नी सुशीला इतनी सुंदरबहू पा कर फूली नही समा रही थी लेकिन सास और बहू का रिश्ता भी कुछ अजीब
सा होता है और उस रिश्ते के बीचों बीच फंस के रह जाता है बेचारा लड़का, माँ का सपूत और पत्नी के प्यारे पतिदेव, जिसके साथ उसका सम्पूर्ण जीवन
जुड़ा होता है| कुछ ही दिनों में सास बहू के प्यारे रिश्ते  की मिठासखटास में बदलने लगी| आखिर लडके की माँ थी सुशीला, पूरे घर में उसका ही
राज था, हर किसी को वह अपने ही इशारों पर चलाना जानती थी और अंशुल तोउसका राजकुमार था, माँ का श्रवण कुमार, माँ की आज्ञा…

जीवन

सादर अभिनन्दन सुधी वृन्द... 
महानुभावों! 
       आज बड़े ही हर्ष के साथ आपसे मुखातिब हो रही हूं,जिसके दो कारण हैं। एक तो यह कि एक लम्बे अन्तराल के बाद पूरे हृदय के साथ आपके समक्ष उपस्थित हो पा रही हूं और दूसरा ये कि हमारे सहयोगी आदरणीय श्री अरुन शर्मा जी के आँगन 'कन्या रत्न' का अवतरण हुआ है। हम अरुन भाई से हम मिठाई नहीं खा सकते कोई बात नहीं पर शब्द सुमन तो साझा कर सकते हैं न! इस खुशी के अवसर आदरणीय अरुन जी के साथ सम्पूर्ण समाज को,मैं एक महिला होने के नाते, महान विद्वान समर्सेट माम (Somerset Maughm) के कुछ शब्द समर्पित करना चाहूंगी- 
''A woman will always sacrifice herself if YOU give her opportunity. It is Favourite FORM for SELF INDULGENCE.''          अब चलते हैं कुछ ऐसे लिंक्स पर, जो मुझे प्रभावित करने में सफल रहे। बाकी आप जरूर बताइगा कैसा लगा आज का संकलन-

कानपुर ब्लोगर्स असोसिएशन "Kanpur Bloggers Association"  ये कैसा भारत निर्माण ... मूल्यों के गिरते स्तर पर , ये कैसा भारत निर्माण ... नैतिकता के शव पे खड़ा , आज का बदलता हिंदुस्तान .... ये कैसा भारत निर्म…