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Showing posts from June, 2013

पिता

सभी मित्रों को नमस्कार!
आज के साप्ताहिक प्रसारण में प्रस्तुत हैं -
'गुजारिश' (http://guzarish6688.blogspot.in/) द्वारा पितृ दिवस पर आयोजित प्रतियोगिता में चयनित रचनायें।
(1)
पिता
घिरा जब भी अँधेरों में सही रस्ता दिखाते हैं । बढ़ा कर हाँथ वो अपना मुसीबत से बचाते हैं ।।

बड़ों को मान नारी को सदा सम्मान ही देना ।
पिता जी प्रेम से शिक्षा भरी बातें सिखाते हैं ।।

दिखावा झूठ धोखा जुर्म से दूरी सदा रखना ।
बुराई की हकीकत से मुझे अवगत कराते हैं ।।

सफ़र काटों भरा हो पर नहीं थकना नहीं रुकना ।
बिछेंगे फूल क़दमों में अगर चलते ही जाते हैं ।।

ख़ुशी के वास्ते मेरी दुआ हरपल करें रब से ।
जरा सी मांग पर सर्वस्व वो अपना लुटाते हैं ।।

मुसीबत में फँसा हो गर कोई बढ़कर मदद करना ।
वही इंसान हैं इंसान के जो काम आते हैं ।।

                               - अरुण शर्मा 'अनन्त
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(2)

पिता 

चलते-चलते कभी न थकते,ऐसे होते पाँव!
पिता ही सभी को देते है,बरगद जैसी छाँव!! 

परिश्रम करते रहते दिनभर,कभी न थकता हाथ!
कोई नही दे सकता कभी, पापा जैसा साथ!!

बच्चो के सुख-दुःख की खातिर,दिन देखें न रात!
हरदम तैयार खड़ें रहते,देने को सौगात!!

पिता न…

हे प्रभु आनंद दाता

हे प्रभु!आनंद दाता!!ज्ञान हमकोदीजिये| शीघ्र सारेदुर्गुणोंको दूर हमसेकीजिये|| हे प्रभु…
लीजियेहमको शरण में हम सदाचारीबनें| ब्रह्मचारीधर्मरक्षकवीरव्रतधारीबनें|| हे प्रभु…
निंदाकिसी कीहमकिसीसेभूल कर भी न करें| ईर्ष्या कभी भी हमकिसीसेभूल कर भी न करें|| हे प्रभु………
सत्य बोलें झूठ त्यागें मेल आपस में करें| दिव्य जीवन हो हमारा यश तेरा गाया करें|| हे प्रभु………
जाये हमारी आयु हे प्रभु!लोक के उपकार में| हाथ ड़ालें हम कभी न भूलकर अपकार में|| हे प्रभु………
कीजियेहम पर कृपा ऐसी हे परमात्मा! मोह मदमत्सररहित होवे हमारी आत्मा || हे प्रभु………
प्रेम से हमगुरुजनोंकी नित्य ही सेवा करें | प्रेम से हम संस्कृति की नित्य ही सेवा करें|| हे प्रभु…
योगविद्याब्रह्मविद्याहो अधिक प्यारी हमें |

ज़रूरत

सभी साथियों को मेरा नमस्कार!
आज बहुत दिनों बाद आपसे रूबरू हो सकी हूं। आप सबके लिए आज आप ही लोगों के बीच से कुछ लिंक्स चुनकर लायी हूं। देखिए, शायद आपको पसंद आएं!
बनूं तो क्या बनूं

बनूं तो क्या बनूं और आखिर क्यों बनूं? बनूं तो क्या बनूं और आखिर क्यों बनूं? बना इंसान तो नाहक मैं मारा जाऊंगा।


छुपा लाया

खूब धन देखिए कमा लाया साथ कितनी वो बद्दुआ लाया काफिले छूट ही गए पीछे कर्म तेरा वो जलजला लाया धूप का साथ काफ...


मर्द की हकीकत
मर्द की हकीकत  ''प्रमोशन के लिए बीवी को करता था अफसरों को पेश .''समाचार पढ़ा ,पढ़ते ही दिल और दिमाग विषाद और क्रोध स...


MATRITWA / मातृत्व

PIC-GOOGLE पिछले महीने जावेद अख्तर जी  ने संसद के एक सत्र के दौरान एक मुद्दा उठाया था मातृत्व के सन्दर्भ में ...उनका एक प्रश्न सचमुच दि...


कुछ बातें डायरी के पन्नों से

सारा मानवीय इतिहास त्रासदी और अत्याचार की कहानियों से भरा हुआ है। मानव के विकास के क्रम में जब पहली बार किसी मानव के हाथ में किसी प्रक...


बहुत आत्म मुग्धा हो रही हूँ

मेरे हर प्रेम निवेदन के आक्रोश के संतोष के विक्षोभ के केंद्र में तुम रहते हो एक बिंदु की तरह …

मन के भाव

सभी मित्रों को नमस्कार! वंदना जी की अनुपस्थिति में अपनी पसंद के कुछ लिंक्स लेकर आज मैं आपके समक्ष हाजिर हूं।
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वो मूक नहीं राम चरण डंडे से लगातार अपनी गाय को पीट रहा था और गाय थी कि टस से मस नहीं हो रही थी वो अपनी जगह ही खड़ी थी , उसकी आँखों से आँसू बह रहे ...
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उच्चारण: "जल बिना बेरंग कितने" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मय...
रूप कितने-रंग कितने। बादलों के ढंग कितने।।   कहीं चाँदी सी चमक है, कहीं पर श्यामल बने हैं। कहीं पर छितराये से हैं, कहीं पर ...


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मन की मौज

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वर्षा रानी आगई .... वह आया /   अपने संग ... उसे भी ...  लाया ।  अपने विशाल , बाजुओं में समेटे ... आसमान से चौड़े ..  सीने से लपेटे ।  जिसके लिए / ...
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अंतिम चीख प्रथम कविता का उनवान लिखा करती है  " कविता कुछ के लिए कथा है कविता कुछ के लिए प्रथा है कविता मेरे लिए व्यथा है वारिश में भींगे कुछ लावारिश से शब्द हमारी सिसकी हैं , ...
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कुछ प्रश्न अनुत्तरित रहने दें सारा जीवन गंवा दिया है प्रश्नों के उत्तर देने में, बैठें भूल सभी बंधन को, कुछ प्रश्न अनुत्तरित रहने दें. सूरज पाने की चाहत में...
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ड्राइविंग म…

शब्दों की पोटली

दोस्तों को मेरा नमस्कार!
आजकल वंदना जी अत्यन्त व्यस्त हैं तो उनके आदेश पर आज मैं अपनी पसंद के कुछ लिंक्स लेकर आपके समक्ष हाजिर हूं। देखें, आपको ये लिंक्स कैसे लगते हैं!


हार्दिक शुभकामनाओं सहित! अरुण कुमार निगम:  विवाह की इकतीसवीं वर्षगाँठ ::  सपना-अरुण निगम (मदिरा सवैया)  ब्याह हुये इकतीस सुहावन साल भये नहिं भान हुआ   नित्य निरंतर जीवन में पल का पहिया गतिमान हुआ  -------------------- Kashish - My Poetry:  शब्दों की पोटली ---------------------------- स्वप्न मेरे...........:  काजल रोज़ लगाने का मन करता है ...
------------------------------- उच्चारण: "वीरान गुलशन सजाकर दिखा तो" ..:  मुझे आज अपनी मुरलिया बना तो  तू एक बार होठों से मुझको लगा तो  संगीत को छेड़ दूँगी मैं दिलवर  तू इक बार मुझको उठाकर बजा तो... ----------------------- दास्ताँने - दिल (ये दुनिया है दिलवालों की):  प्यार के दोहे -------------------------------- ॥ दर्शन-प्राशन ॥: भव्य अनुभूति:    शब्द नहीं हैं सुख वर्णन के  नित्य ह्रदय में उत्सव महके  मुख-द्वार पर सभी स्वरों के  बारी-बारी अक्षर चहके।  --------------------------- उन्नयन (UNNAYANA): मै…

परिचय : सरिता भाटिया

नाम : सरिता भाटिया
जन्म : 6-मार्च  क़ादिया [जिला गुरदासपुर,पंजाब] शिक्षा : सेकंडरी ...वेद कौर कन्या विद्यालय ,कादिया बी.एस.सी...बैरिंग यूनियन क्रिश्चियन कालेज ,बटाला बी.एड.........डी.ए.वी.कालेज फार विमिन,अमृतसर
पिता का नाम : स्वर्गीय श्री जनक राज भाटिया माता का नाम : श्रीमती राज भाटिया
सेवा : प्रधानाचार्य...पैराडाइज़ पब्लिक स्कूल, उत्तम नगर,नई दिल्ली. मैनेजर.... भाटिया कॉलेज, उत्तम नगर,नई दिल्ली.
लेखन : अंजुम मासिक पत्रिका,श्री गंगानगर,राजस्थान में हर माह रचना छपती है * 'सृजक' मोतिहारी बिहार त्रैमासिक पत्रिका में रचनाएँ * 'नव्या' सुरेंदरनगर,गुजरात में रचना * 'नव्या ' इ मैगज़ीन में रचनाएँ * 'सक्षम' मासिक पत्रिका गुड़गाव, में रचना * 'पंचमहल उजागर' साप्ताहिक गोधरा, गुजरात. में रचनाएँ * 'मानस वंदन' मासिक पत्रिका,उज्जैन,में रचनाएँ * 'राज एक्सप्रेस' दैनिक समाचार पत्र,भोपाल में रचनाएँ

ब्लॉग :गुजारिश मेरी …

अबाधित धार...

जय हिन्द सुहृद मित्रों ! 
सुहानी सी सुबह में सप्ताहांत संकलन के साथ में आपका स्वागत है। चलना जीवन का नाम... है न? अब चाल क्यों न कछुए की रफ्तार से हो, पर निरन्तर चलते रहना चाहिए। निरंतरता का परिणाम तो सदैव सकारात्मक होता है, कुछ देर भले हो जाए । ऐसे ही हमारे निर्झर का प्रवाह भी मंद गति ही सही पर लगातार हो रहा है। कहते हैं, ठहरे हुए जल में भी सड़न उत्पन्न हो जाती है, तो हमारा ठहरना भी उचित नहीं होगा, चलते हैं, आज के रोचक सूत्रों के निर्झर की अबाधित धार में गोते लगाने- 


अबाधित धार हो प्रभु स्नेह की तुम : तारिणी
अज अनन्त निर्विकार प्राणनाथ करुनागार   निरुद्वेल निरुद्वेग निश्चल सरोवर चेतसः।   अन्तरज्ञ सर्वज्ञ शब्द सर्वथा निरर्थ जानो 
कोई काँटा चुभा नहीं होता.................बशीर बद्र  कोई काँटा चुभा नहीं होता  दिल अगर फूल सा नहीं होता  कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी  यूँ कोई बेवफ़ा नहीं होता 
गैस सिलेण्डर है वरदान  डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ...  गैस सिलेण्डर कितना प्यारा।  मम्मी की आँखों का तारा।।  रेगूलेटर अच्छा लाना।  सही ढंग से इसे लगाना।।   
 ग़ज़ल/ कौन रास्ता लाया  इस जगह कौन रास्ता लाया   कुछ अजब दिल से…